Saath nibhana Saathiya season 2 || 10 December Episode Story & Facts

दोस्तों आज इस कमाल के आर्टिकल मैं आपको पढ़ने को मिलेगा कि साथ निभाना साथिया सीजन 2 के एपिसोड में क्या होगा वैसे तो आप सब जानते ही हैं कि सीजन 2 एपिसोड में क्या चल रहा है साथ निभाना साथिया टू के और अगर आप जानना चाहते हैं आगे क्या होगा तब हमारी वेबसाइट को विजिट करते रहिए ताकि आपको लेटेस्ट अपडेट मिलती रहे और टेलीग्राम चैनल को भी ज्वाइन कर लीजिए टाइम पर अपडेट पाने के लिए।

 

 

 

Saath nibhana Saathiya season 2 full episode

 

 

फिर कहना बोलती है कि वह मुझे आपके पास आना है माफ करना बात पर मैं आपकी कसम तोड़ कर यह लकीर करके वक्त पर आ रही हूं आपके पास तभी देखेंगे आप वहां पर सुरा जाती है और उसकी मां जाती है उसे खींच कर वहां से ले जाती है फिर सुधा कहती है क्या कर रही थी तुम आकर भेज कर आई हो क्या दिखाई नहीं दिया बाकी खींची हुई लकीर तुम्हें बोलो फिल्म गाना बोलती है।

 

सुरा देखो ना बाकी की तबियत कितनी खराब है उन्हें मेरी जरूरत है मुझे अंदर जाना है वह बोलती है उन्हें तुम्हारी जरूरत नहीं है मैं इस घर की बड़ी बहू और तुम्हारी जेठानी मैं बोल रही हूं तुम अंदर नहीं जाओगे कहना उनसे शॉट्स उठाती और कहती है छोड़ो सूरा उसके हाथ बांधने लगती है रस्सी से और कहती है कि क्या कहा था।

 

मैंने कहना तुम्हें इस घर के सारे स्थान को उखाड़ कर फेंक दूंगा इस साल की सबसे बड़ी स्तंभ है बा और क्या लगता है तुम्हें बाकी तबीयत उनके बुढ़ापे की वजह से खराब हुई है नहीं मैंने की है अब तो तुम्हारी ओल्डी गोल्डी गई गाना बोलती है कि सुरा खबरदार अगर ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया था मैं जाऊंगी मतलब जाऊंगी फिर उसकी मां उसका मुंह बांध देती है दुपट्टे से फिर उसके बाद में लगती है।

 

आनंद कहता है कि जाओ जोर से चिल्लाता है वहां पर आप दुआ कर भाग जाती है और अंदर चली जाती है। गाना जोर से चिल्लाती है बा पर वह एक सपना होता है और गाना उठती है चिल्लाते हुए और बोलती है कि मैं उन दोनों को अपने परिवार पर एक भी खरोश नहीं होने दूंगी जो सपना मैंने देखा है उसे कभी सच नहीं होने दूंगी फिर अगले दिन सुबह होती है अब आपने रूम से आती है फिर देखते हैं।

 

 

आपकी बार ओम साथी है बाहर कहना फर्श पर लौटे हुए होती है और सो रही होती है वो बोलती है कि तू यहां क्यों सो रही थी गेना बोलती है कि बाप प्लीज अपनी बेटी को माफ कर दीजिए ना ही लकीर मिटा दीजिए ना बा उसकी मां बोलती है कि गाना आज प्रतियोगिता का आखरी दिन है वहां पर मैं देरी से पूछ कर अपने परिवार की बेज्जती नहीं करवाना चाहती है वहां से जाने दे फिर वहां पर वाले सभी आ जाते हैं।

 

 

फिर वहां पर सुला देती है कि अपनी मां से इस गाना को सही कहती हो बेवकूफ अरे क्या जरूरत है यह गोल्डी गोल्डी नहीं मानने वाली है देखना उसकी मां बोलती है सूरज से बेवकूफ तो तू है गहना दिमाग से नहीं दिल से भी खेल रही है गाना बोलती है बाबा मैं आपसे दूर नहीं रह सकती और उनके पैरों में पड़ जाती है और कहती है लकीर मिटा दीजिए ना प्लीज उसकी वह बोलती है कि यह जमीन लकीर पर नहीं मेरे दिल पर खींची गई है इसे कैसे मिटाएं फिर उसका पति बोलता है।

 

 

इतनी जीत भी अच्छी नहीं है हो तुम दोनों के बीच की दूरी है मिटाना चाहती है मिटाने दे उसे फिर आनंद बोलता है कि हम आ जाओ जी सही कह रहे हैं क्योंकि कहना शोर के करीब जा रही थी पर एक तरफ लकीरे कोई मतलब ही नहीं है क्योंकि आपने खुद स्वरों को अपने साथ बिठाया है फिर बोल दिया उसकी बात यहां पर सुआरा और कहना कि नहीं है बात यहां पर मेरे मांगी है जिस सम्मान को कमाने के लिए मैंने उम्र मिटा दी वह इस एक पल में गहने ने मिटा दिया हर बात में मेरे खिलाफ यह सही और मैं गलत है तो बस तो मैंने भी हां लकीर खींच दी।

 

 

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